पर्यटन नगरी ग्वालदम में दो दिवसीय कला धरोहर कार्यशाला

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पर्यटन नगरी ग्वालदम में दो दिवसीय कला धरोहर कार्यशाला

शुरू।

 थराली/ चमोली

मीराबाई जयंती पर फूलों से सजती है कृष्ण की नगरी, दुनिया को याद है उनकी भक्ति की कहानी माना जाता है कि मीराबाई का जन्म आज यानी आश्विन मास की पूर्णिमा को हुआ था। वो एक विख्यात कृष्ण भक्त हैं।जानते हैं मीराबाई जयंती क्यों मनाई जाती है और इसकी कहानी।
मीराबाई का नाम तो आपने सुना ही होगा। मीराबाई अपनी कृष्ण भक्ति के लिए दुनियाभर में विख्यात हैं। आज उनके जन्मोत्सव के अवसर पर । माना जाता है कि आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा के दिन ही मीराबाई का जन्म हुआ था। उनके जन्मदिन पर हर कृष्ण मंदिर की खास प्रकार से सजावट की जाती है। आज के दिन कृष्ण की नगरी फूलों से सज जाती है और फिर सुंदर संगीत और भक्तिमय नृत्य के साथ कृष्ण की भक्ति की जाती है। तो आइए आज के दिन याद कर लेते हैं कृष्ण की इस खास भक्त को।

मीराबाई को भगवान कृष्ण की परम भक्त माना गया है। वह 16वीं सदी की कवयित्री थीं जो कृष्ण के भजन गायन में लगी रहती है। लेकिन, असल में वह एक राजकुमारी थीं जिनका जन्म साल जोधपुर, राजस्थान के राजा रतन सिंह के घर 1498 में हुआ था। विवाह की उम्र होने पर मीराबाई की शादी मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से कर दी गई थी। उनके जन्मोत्सव की अवसर पर भारत सरकार द्वारा कला धरोहर कार्यक्रम का आयोजित किया जा रहा है
केंद्रीय विद्यालय एस एस बी ग्वालदम के छात्र-छात्राओं के मीराबाई के 525 जन्मोत्सव के अवसर पर एस एस बी ऑडिटोरियम में दो दिवसीय कला धरोहर कार्यशाला की शुरुआत हुई। पहले दिन बुधबार को मुरली मनोहर उप्रेती ने छात्रों को मीरा बाई के भजन सिखाएं। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि अतुल राय द्वितीय कमान अधिकारी, विशिष्ट अतिथि विदुषी डॉक्टर बसंती बिष्ट “पद्मश्री “उपस्थित रहे इस मौके पर भजन गायक मुरली मनोहर उप्रेती, सौरभ,दिव्या परिहार, मंजू मेहरा द्वारा “पिया जी म्हारे नैना आगे रिजो जी, पायोजी मैंने राम रतन धन पायो जैसी “पंडित कुमार गंधर्व द्वारा बनाई गई बंदिशों के रुप में मीरा बाई के भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

यह आयोजन संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में कला धरोहर कार्यशाला शुरू हुई। इसमें मुरली मनोहर उप्रेती ने मीरा बाई पर आधारित एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दीं।

इस अवसर पर विदुषी बसंती बिष्ट पद्मश्री ने बताया कि यह पहल भारतीय प्रदर्शन कलाओं के ज्ञान को फैलाने और युवा प्रतिभाओं को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। और हमें अपनी धरोहर बोली भाषा को सजोये रखना चाहिए

इस अवसर पर कार्यक्रम संचालक डॉ संतोष क्रांति, असिस्टेंट कमांडेंट जसवीर तोमर, प्रधानाचार्य केंद्रीय विद्यालय अजय घिड़ियाल, हरीश जोशी, हीरा सिंह बडियारी आदि मौजूद थे।


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