आध्यात्मिक गुरु और वैश्विक मानवतावादी मैत्रेय दादा श्री जी ने शनिवार को देहरादून के साईं मंदिर परिसर में आयोजित देव-दीक्षा सत्र में श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

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देहरादून में पहली बार आयोजित हुआ मैत्रेय दादा श्री जी का देव-दीक्षा सत्र, मार्गदर्शन से लाभान्वित हुए श्रद्धालु

देहरादून:

आध्यात्मिक गुरु और वैश्विक मानवतावादी मैत्रेय दादा श्री जी ने शनिवार को देहरादून के साईं मंदिर परिसर में आयोजित देव-दीक्षा सत्र में श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

इस विशेष सत्र में दादा श्री जी ने उपस्थित लोगों को यह मार्गदर्शन दिया कि वे अपने जीवन में किस प्रकार भगवत कृपा का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। यह पहला अवसर था जब उत्तराखंड में मैत्रेय दादा श्री जी का देव-दीक्षा सत्र आयोजित हुआ।

मैत्रेय बोध परिवार, जिसकी स्थापना स्वयं मैत्रेय दादा श्री जी ने 2013 में की थी, का उद्देश्य लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर और झूठ से सच्चाई की ओर ले जाना है। दादा श्री जी ने इस अवसर पर कहा कि यह परिवर्तन हमारे अंदर मौजूद भ्रम को दूर करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने ज्ञान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सच्चा ज्ञान बोलकर नहीं, बल्कि सहज भाव से साथ रहता है। दादा श्री जी ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य शुद्ध भाव वाले लोगों को एक साथ लाकर देश की उन्नति में योगदान देना है और सभी के जुड़ने से ही यह परिवर्तन संभव होगा।

मैत्री बोध परिवार की सदस्य मैत्री अनिता ने परिवार के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस परिवार में सभी सदस्य एक मित्र की तरह रहते हैं। प्रेम, स्वार्थरहित सेवा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना मैत्री बोध परिवार के तीन मुख्य स्तंभ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार का मुख्य उद्देश्य विश्व में सभी के दिलों में प्यार और शांति की स्थापना करना है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैत्री बोध परिवार के अनेक सदस्य और मैत्रेय दादा श्री जी के सैकड़ों अनुयायी उपस्थित रहे, जिन्होंने दादा श्री जी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और उनसे प्रेरणा प्राप्त की।


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