बहुभाषाविद धर्म सिंह फरस्वाण की पुस्तक का विमोचन, देश ही नही विदेशों में भी हिंदी सीखने वालों को मिलेगी मदद।
चमोली
अंतर्राष्ट्रीय साहित्य संस्कृति एवं कला सम्मेलन स्पर्श हिमालय महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर पिंडर घाटी के विकासखंड थराली के सोल घाटी के बुरसोल निवासी बहुभाषाविद समाजसेवी एवं दिशानिर्देश धर्म सिंह फरस्वाण एवं रोशनी फरस्वाण की पुस्तक का विमोचन किया गया इस अवसर पर

मुख्य अतिथि गजेंद्र सिंह शेखावत संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री भारत सरकार, अति विशिष्ट अतिथि अजय टम्टा राज्य मंत्री सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय विशिष्ट अतिथि संतोष चौबे कुलपति टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल एवम स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के पावन सानिध्य में तथा भूतपूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व भूतपूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी आदि ने बहुभाषाविद, समाजसेवी व दिशानिर्देशक धर्म सिंह फरस्वॉण एवम रोशनी फरस्वॉण की इस पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक में हिंदी भाषा के प्रचार- प्रसार के लिए ढाई हजार से अधिक हिंदी क्रियाओं का संकलन किया है जो कि विभिन्न देशों के लोगों को हिंदी सीखने के लिए बहुत कारगर सिद्ध होगी।
वैश्वीकरण और बाजारवाद के परिप्रेक्ष्य में भविष्य में हिंदी का महत्व बढ़ रहा है। व्यावसायिक, व्यापारिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से भारत एक विकसित देश बनने जा रहा है।
हिन्दी की व्यापकता के कारण विश्व के 175 देशों में हिन्दी शिक्षण एवं प्रशिक्षण के अनेक अध्ययन केन्द्र बन गये हैं। विश्व के लगभग 180 विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में हिन्दी का शिक्षण एवं प्रशिक्षण चल रहा है।
अकेले अमेरिका में 100 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। इससे हिन्दी का वर्चस्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
ऐसे बहुत से देश हैं जहां भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं जैसे – भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और पाकिस्तान आदि। भारतीय संस्कृति से प्रभावित दक्षिण पूर्व एशियाई देश, जैसे इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, कोरिया , जापान, चीन और मंगोलिया आदि।
आज बारह से अधिक देशों में हिन्दी समाज की मुख्य भाषा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, जर्मनी, नेपाल, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, यमन और युगांडा जैसे देशों में हिंदी भाषी भारतीयों की आबादी (20 मिलियन से अधिक) है इसलिए हिंदी भाषा का महत्व विश्व में बहुत अधिक है और आगामी समय में हिंदी भाषा देश विदेश के व्यवसायी लोगों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होगी। हिंदी सीखने के कुछ कारण दिए गए हैं।
अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसके दुनिया भर में 500 मिलियन से अधिक वक्ता हैं। आप भारत और अन्य स्थानों पर जहां हिंदी प्रचलित है, बहुत से लोगों से संवाद कर सकते हैं।
भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में, हिंदी सीखने से भारतीय आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से के साथ संवाद करने और जुड़ने के द्वार खुलते हैं। भारत की विविध संस्कृति, जीवंत अर्थव्यवस्था और समृद्ध विरासत इसे यात्रा, कार्य और सांस्कृतिक अन्वेषण के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती है। विभिन्न कारणों से, व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों तरह से, हिंदी सीखना महत्वपूर्ण है।
हिंदी सीखने से आपको भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन शैली को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह आपको हिंदी साहित्य, संगीत और फिल्मों की सराहना करने और उनका आनंद लेने में सहायता कर सकता है।
जनतांत्रिक आधार पर हिंदी विश्व भाषा है क्योंकि उसके बोलने-समझने वालों की संख्या संसार में तीसरी है।
विश्व के 132 देशों में जा बसे भारतीय मूल के लगभग 2 करोड़ लोग हिंदी माध्यम से ही अपना कार्य निष्पादित करते हैं।
इंटरनेट पर हिंदी भी स्वीकार्य और लोकप्रिय हो रही है। हिंदी पत्रकारिता और हिंदी साहित्य भी अब इंटरनेट के माध्यम से विश्वभर में प्रसारित होने लगा है। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा तथा इसकी विभिन्न समितियों एवं उपसमितियों के लिए आधिकारिक तथा कार्य संचालन की भाषाओं की व्यवस्था की गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रथम अधिवेशन में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को छोड़कर इसके सभी संगठनों के लिए अंग्रेजी, फ़रैँच, रूसी, चीनी और स्पेनिश को आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ की छह आधिकारिक भाषाएं हैं। भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में एक महत्वपूर्ण देश है । इसके बावजूद भी आज संयुक्त राष्ट्र संघ की सातवीं आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को विश्व भाषा का दर्जा नहीं मिल सका। हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाए जाने की मुहिम की शुरूआत भारत के नागपुर में 10 जनवरी, 1975 को आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन में हुई थी। हमें हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा के लिए वकालत करनी होगी और हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने का प्रयास संयुक्त रूप से किया जाना चाहिए।
