बिजली चोरी की जांच ईडी और सीबीआई से कराने की मांग

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बिजली चोरी की जांच ईडी और सीबीआई से कराने की मांग

देहरादून।

उत्तराखंड में रुड़की और काशीपुर सर्किल में संचालित स्टील फैक्ट्रियों द्वारा बड़े पैमाने पर बिजली चोरी किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

स्थानीय उद्योगपतियों ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रति माह करीब 5 करोड़ यूनिट बिजली चोरी कराई जा रही है, जिसकी कीमत लगभग 40 करोड़ रुपये बैठती है। इस प्रकार सालाना 500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। इस घाटे की भरपाई ईमानदारी से काम करने वाली फैक्ट्रियों और आम उपभोक्ताओं के टैरिफ में वृद्धि कर की जा रही है।

ईडी और सीबीआई से जांच की मांग

रुड़की, लंढोरा और काशीपुर सर्कल में स्टील फैक्ट्रियों द्वारा बिजली चोरी की घटनाओं को उजागर करने के लिए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) से जांच की मांग की गई है। आरोप है कि इन फैक्ट्रियों ने चार से आठ फर्नेस लगा रखे हैं, लेकिन विद्युत बिल केवल एक फर्नेस का दिखाया जाता है। बाकी फर्नेस चोरी की बिजली से संचालित होती हैं। यहां लाइन लॉस 65% से 70% तक है, जिससे अन्य उपभोक्ताओं को अनावश्यक टैरिफ वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली चोरी का प्रभाव

बिजली चोरी के कारण सही ढंग से काम करने वाली फैक्ट्रियां प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही हैं और कई बंद हो चुकी हैं। आरोप है कि उत्तर प्रदेश से कई स्टील फैक्ट्रियां अपने कार्य को समेटकर उत्तराखंड में आ रही हैं, जहां उन्हें विद्युत अधिकारियों की मिलीभगत से सस्ती बिजली उपलब्ध हो जाती है।

नीति सुधार की आवश्यकता

उत्तराखंड सरकार से मांग की गई है कि इस मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, जो जांच करे कि प्रत्येक फैक्ट्री में कितनी भट्टियां स्थापित हैं और कितनी का बिल जमा किया जा रहा है। साथ ही, यह भी मांग की गई है कि उत्तर प्रदेश की नीति का अनुसरण करते हुए उत्तराखंड में विद्युत टैरिफ कम किया जाए।

आवश्यक कार्रवाई का अल्टीमेटम

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर सरकार द्वारा उपरोक्त मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे विरोध स्वरूप सड़कों पर उतरेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


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