Chamoli
विगत तीन दिनों से जल रहे ग्वाड़ कपीरी के जंगल*
विगत शुक्रवार को अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा ग्वाड़ कपिरी के जंगल में आग लगा दी गई।

जिससे बाज़ , बुरांश, काफल आदि चौड़ी पत्ती के हजारों पेड़ जलकर नष्ट हो गए। ग्रामीणों ने स्वयं के संसाधनों से पूरी रात आग बुझाने का प्रयास किया जिस पर शनिवार सुबह 6 बजे काबू पाया जा सका। लेकिन शनिवार दोपहर को आग एक बार फिर भड़क गई, जिससे आग फिर आस पड़ोस के गांवों की तरफ बढ़ने लगी। गांव की महिलाओं, बच्चों एवं युवाओं ने अपने अथक प्रयासों से शनिवार शाम तक आग को बुझाने में सफलता प्राप्त की। ग्रामीणों ने घर से डब्बों में पानी ले जाकर आग बुझाई लेकिन सूचना देने पर भी विभाग से कोई भी कर्मचारी अधिकारी सुध लेने नहीं आया, जिसपर ग्रामीणों द्वारा रोष व्यक्त किया गया ।
स्थानीय ग्रामीण डॉक्टर जगदीश कंडवाल ने बताया कि यहां बांज, बुराश, काफल , किंगोड़ी, अयार, भमोरा आदि प्रजाति के हजारों पेड़ इस अग्नि कांड की भेंट चढ़ गए।आग लगने से जंगली जानवरों एवं पक्षियों को भी भागते हुए देखा गया।उन्होंने विभाग से वनाग्नि जागरूकता अभियान दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में एवं स्थानीय विद्यालयों में चलाए जाने की मांग की।महेंद्र सिंह कंडवाल का कहना है कि फायर सीजन के बाबजूद भी विभाग स्तर पर बनाग्नि नियंत्रण में इतनी निष्क्रियता चिंतनीय है।
आग बुझाने वालों में महेंद्र कंडवाल, सतेंद्र सिंह कंडवाल डाक्टर जगदीश कंडवाल, राजेंद्र सिंह कंडवाल , विनोद सिंह कंडवाल गजेंद्र सिंह कंडवाल, संगीता देवी कंडवाल गीता देवी कंडवाल, पूजा देवी कंडवाल , लक्ष्मी देवी बिष्ट, विनीता देवी कंडवाल, दक्ष , प्रिंसी, अंशुल, ऋतु, गीता, दिनेश सिंह कंडवाल, सुनील सिंह बिष्ट आदि ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं तथा बच्चों ने अपना सहयोग दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आग के फिर भडकने से चारों ओर धुवां ही धुवां होने से ग्रामीणों को स्वास लेने में कठिनाई हो रही है।
