गौचर / चमोली
*समुदाय एवं शिक्षक मिलकर निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को पूरित करें :आकाश सारस्वत*
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गौचर (चमोली) में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान(FLN) के तहत निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को 75% तक प्राप्त करने वाले निपुण विद्यालयों के शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रारंभ हो गया है l
प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने कहा कि विद्यालय निपुण भारत के लक्ष्यों को पूरित करें। उन्होंने
विद्यालय की प्रार्थना सभा पर जोर देते हुऐ कहा कि प्रार्थना सभा बेसिक शिक्षा की कुंजी है जिन विद्यालयों में प्रार्थना सभा विभिन्न गतिविधियों से समृद्ध है उन विद्यालयों में बच्चों का ज्ञानार्जन स्तर भी उच्च पाया जा रहा है। बच्चे प्रार्थना सभा में सामूहिक रुप से विभिन्न गतिविधियों में प्रतिभाग करते हैं जिससे उनमें आत्मविश्वास के साथ बातचीत का गुण स्वतः विकसित हो जा रहा है। शिक्षक व प्रधानाध्यापक अपने बच्चों के चहुँमुखी विकास हेतु समुचित अवसर प्रदान करें। सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाकर निपुण लक्ष्यों को प्राप्त करना आसान हो रहा है। समुदाय घर पर सीखने का उचित वातावरण बच्चों को दें । विद्यालय किचन गार्डन का विकास करें। बहुभाषी प्रार्थना सभा सप्ताह के दिनों में आयोजित करें।
प्राचार्य ने विद्यालयों द्वारा पुस्तकालय का समुचित प्रबंधन व उपयोग करने पर सभी को बधाई दी और सतत रुप से बिना थके अपने कार्य दायित्वों को पूर्ण करने के लिये विभिन्न विद्यालयों के प्रयासों को साझा किया। शिक्षक बिना शोर मचाये अपने कार्यों को कर रहे हैं इसे बृहद रुप में सभी के द्वारा अपनाये जाने के लिये सभी को प्रेरित किया। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य लखपत सिंह बर्त्वाल ने राज्य स्तरीय निपुण विद्यालय पुरस्कार से पुरस्कृत विद्यालय के शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि अन्य विद्यालय भी इनसे प्रेरित होकर जनपद को निपुण जनपद की श्रेणी में लाएंगे।
प्रशिक्षण व डायट स्तरीय बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान के समन्वयक गोपाल कपरुवान ने 5 दिवसीय कार्यक्रम की रुपरेखा सभी के सामने रखी और सभी प्रतिभागियों से अपने अनुभवो से इस प्रशिक्षण को जीवंत और चर्चा परिचर्चा युक्त बनाने का आग्रह किया।
प्रथम दिवस पर एफएलएन शिक्षक संदर्शिका का उपयोग, भाषा (सारंगी ) व आनंदमय गणित की पुस्तकाओं में समाहित आमुख में पुस्तकों का उपयोग इनके निर्माण का उद्देश्य व विषय वस्तु में दी गयी, विभिन्न थीम पर चर्चा, बरखा सीरीज की पुस्तकों का स्तरीकरण व पाठ्यपुस्तक से इनका जुड़ाव, जेंडर तथा लिंग व इनसे जुडी रूढ़िवादिता तथा साहित्य व साक्षरता की अवधारणा पर विस्तृत बातचीत की गयी।
इस अवसर पर डायट संकाय सदस्य डॉ गजपाल राज, सुबोध डिमरी व प्रशिक्षण में सन्दर्भदाता के रुप में श्रीमती अंजना खत्री, श्रीमती विमला रावत, श्रीमती विमला भंडारी व श्रीमती पानू चौहान उपस्थित रहे l प्रशिक्षण में कुल 78 प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।
