बैसाखी पर्व से पिंडर घाटी में विभिन्न स्थानों पर लगने वाले मेलों का आगाज।
चमोली
बैशाख का महीना शुरू होते ही पिंडर घाटी उमंग और उल्लास में डूब गयी है।यहां बैसाखी पर्व के साथ पूरी पिंडर घाटी में मेलों का उत्सव शुरू हो गया है। ये मेले आज भी आपसी मेल-जोल का प्रतीक हैं। साथ ही पिंडर घाटी की पौराणिक परंपराओं को जीवंत करने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। बैसाखी के पर्व पहाडो मे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। बैसाखी के पर्व से पिंडर घाटी के अलग-अलग गाँवो में पांच दिन तक चलने वाले मेलो की अनूठी परंपरा हैं। पूरे पांच दिन तक अलग-अलग स्थानों पर पूरे हर्षो उल्लास के साथ मेलों का आयोजन किया जाता है। बैसाखी से शुरू होकर पांच दिनों तक लगने वाले ये मेले सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक ही सीमित नहीं होते, बल्कि ये यहां की परंपरा, संस्कृति, भाई-चारे एवं सामाजिक सौहार्द्र के प्रतीक भी हैं।
बैसाखी को अलग-अलग स्थानों से क्षेत्र में महादेव, कालिंका, भूमियाल, घडियाल, विनसर आदि देवी-देवताओं की डोली, देव मूर्तियां, निसाण ढ़ोल दमाऊ भुकोर के साथ पवित्र स्नान के लिए पिंडर नदी में पहुंचते हैं। यहां देव डोलियों और निसाण के मिलन का दृश्य बेहद भावुक भी होता है।
इस मोके पर विधायक भूपाल राम टम्टा,मेला कमेटी अध्यक्ष गजेंद्र सिंह भंडारी, गोविंद सिंह भंडारी, प्रधान मनीष सती, जयंती प्रसाद, नैन सिंह खत्री, नारायण सिंह,दिलीप सिंह, त्रिलोक सिंह, गोविंद सिंह, विक्रम राता
मंडल अध्यक्ष गिरीश चमोला, उपाध्यक्ष महिपाल भंडारी,खिलाफ सिंह बिष्ट बताते हैं कि ये परंपरा आज भी भाव विभोर कर देती है। बैसाखी पर्व की शुरुआत पंती और कुलसारी से होती है। यहां क्षेत्र के देवी-देवताओं के पश्वा निसाणों के साथ पिंडर नदी में डुबकी लगाने पहुंचते हैं। यहां गांवों से श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है। इन मेलों में पिंडर घाटी की सांस्कृतिक विरासत के साक्षात दर्शन होते हैं। अगले दिन से अलग-अलग गांवों में मेलों का आगाज होता है। पंती में भगवान महामृत्युंजय महादेव अपने पश्वाओं और देवी-देवताओं के निसाणों के साथ पिंडर घाटी में डुबकी लगाते हैं। वहीं नदी के दूसरे छोर पर मींगेश्वर महादेव, कौबेश्वर महादेव, मालेश्वर महादेव, निलाड़ी व हंसकोटी की कालिंका, खैनोली के नारायण भगवान के निसाण और पश्वास ढोल दमाऊं, भंकौरों और शंखनाद ध्वनि के बीच समूहों में नृत्य करते हैं। यह पूरा दृश्य कौतुहल भरा रहता है। इसी तरह कुलसारी में भी बड़ा मेला आदरा महादेव की अगुवाई में लगता है। थराली क्षेत्र के तमाम गांव के देवी-देवताओं का यहां पर भी पिंडर नदी में स्नान एवं मिलन कार्यक्रम होता है।
