मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करना रहा।

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चमोली

शनिवार को उत्तराखंड के सभी जनपदों में राज्य आपदा कंट्रोल रूम के दिशा-निर्देश अनुसार विभिन्न स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई।

इस दौरान जनपद चमोली में भी आपदा की विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी गौरव कुमार के दिशा निर्देशों में राहत एवं बचाव दलों ने त्वरित रैस्क्यू संचालन का अभ्यास किया। जनपद के कुल 6 स्थानों रैणी, जीएमवीएन ज्योतिर्मठ, जिला चिकित्सालय गोपेश्वर, टीएचडीसी पीपलकोंटी, नंदानगर और थराली में आपदा प्रबंधन टीमों ने मॉक रैस्क्यू अभियान चलाया।

रेणी क्षेत्र में ऋषिगंगा नदी पर झील बनने से बीआरओ का मोटर पुल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बनाई गई, जिसमें दोनों ओर लगभग 50 लोगों के फंसने पर रैस्क्यू अभ्यास किया गया।

 

वहीं ज्योतिर्मठ में भूकम्प से जीएमवीएन भवन एवं एक आवासीय भवन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में 15–20 लोगों को सुरक्षित निकालने का ड्रिल किया गया। टीएचडीसी पीपलकोटी की निर्माणाधीन सुरंग में क्षति एवं ऑक्सीजन की कमी के बीच 8–10 कार्मिकों के बचाव का अभ्यास किया गया। जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के आपातकालीन कक्ष के क्षतिग्रस्त होने पर मरीजों व कार्मिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।

इसके अतिरिक्त राजकीय इंटर कॉलेज घाट नंदानगर के दो कक्षों के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर 35–40 छात्रों के रैस्क्यू का अभ्यास किया गया। तहसील थराली में पहाड़ी से मलबा गिरने की अफवाह से उत्पन्न भगदड़ की स्थिति का परीक्षण करते हुए 10–12 घायलों को प्राथमिक उपचार एवं सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की ड्रिल आयोजित हुई।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करना रहा। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नन्द किशोर जोशी,मुख्य चिकित्साधिकारी अभिषेक गुप्ता, एवं सम्बंधित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

 


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