उत्तराखंड में बढ़ा मानव–वन्य जीव संघर्ष, भालू हमलों ने बढ़ाई चिंता

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उत्तराखंड में बढ़ा मानव–वन्य जीव संघर्ष, भालू हमलों ने बढ़ाई चिंता

देहरादून।

उत्तराखंड में हाल के दिनों मानव–वन्य जीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। भालू, बाघ, तेंदुआ और हाथी जैसे वन्य जीव रिहायशी इलाकों में घुसकर लोगों पर हमले कर रहे हैं। विशेष रूप से भालू के हमलों की घटनाएं पिछले दो महीनों में तेजी से बढ़ी हैं। अक्टूबर से अब तक 14 हमले दर्ज किए जा चुके हैं, जिसके बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। विभाग ने सभी जिलों के डीएफओ को स्थानीय लोगों से लगातार संवाद बनाए रखने और उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड के पर्वतीय ज़िलों में मानव–वन्य जीव संघर्ष के मामले इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के इलाकों में भालुओं की मूवमेंट असामान्य रूप से बढ़ रही है।
दो दिन पहले चमोली में एक महिला पर देर शाम भालू ने हमला कर दिया। हमले में महिला का चेहरा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। जिंदगी बचाने के लिए महिला रातभर पेड़ के पीछे छिपी रही। सुबह ग्रामीणों ने उसे घायल अवस्था में देखा, जिसके बाद उसे एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
वही मानव–वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्रा ने सभी डीएफओ के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि भालू और अन्य वन्य जीवों की मूवमेंट को मॉनिटर किया जाए। स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाए। और जहां खतरा अधिक हो, वहां लोगों को अकेले न जाने की चेतावनी दी जाए।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि भालू उस मौसम में भी सक्रिय हैं, जब उन्हें सामान्यत: हाइबरनेशन में होना चाहिए। इसके अलावा हल्द्वानी जैसे तराई क्षेत्रों में भी भालू की मौजूदगी पिछले पाँच सालों में देखी गई है, जो वन्य जीवों के व्यवहार में बदलाव का संकेत है।

2020 से अब तक भालू के हमले—452 घटनाएं, 14 मौतें

भालू हमलों का रिकॉर्ड चिंताजनक है:

2020 — 102 हमले, 3 मौतें

2021 — 97 हमले, 2 मौतें

2022 — 58 हमले, 1 मौत

2023 — 53 हमले, 0 मौत

2024 — 68 हमले, 3 मौतें

2025 — 74 हमले, 5 मौतें (अब तक)

सिर्फ 2025 में ही पांच लोगों की जान जा चुकी है।
मानव वन्य जीव संघर्ष को देखते हुए अब मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक ने आश्वासन दिया है कि संघर्ष को कम करने के लिए जरूरत पड़ने पर तत्काल आदेश जारी किए जाएंगे।


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