बर्फबारी का इंतजार, पहाड़ हुए बेजार औली में छह करोड़ रुपए की लागत से लगी कृत्रिम बर्फ बनाने की मशीनें खा रही जंग

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बर्फबारी का इंतजार, पहाड़ हुए बेजार

औली में छह करोड़ रुपए की लागत से लगी कृत्रिम बर्फ बनाने की मशीनें खा रही जंग

चमोली 

मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी चमोली जनपद के ऊंचाई वाले इलाकों में विशेष कर 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाको में बर्फबारी ओर निचले क्षेत्र में बारिश के पूर्वानुमान के बाद विंटर डेस्टिनेशन औली सहित क्षेत्र के

पर्यटन कारोबारी होटल होम स्टे संचालकों की तैयारियां भी शुरू हो गई है,लेकिन पहाड़ों पर नजर दौड़ाई जाय तो बर्फबारी के आसार अभी तक नजर नहीं आ रहे हैं, कड़ाके की ठंड ओर सर्दी के साथ विंटर डेस्टिनेशन औली में जहां जल नल से लेकर प्राकृतिक जल श्रोत नाले जमने लगे है लेकिन प्राकृतिक बर्फबारी तो दूर की बात है औली की सूखी ढलानों है डेढ़ दशक पूर्व साढ़े छह करोड़ रुपए की का लागत से लगी कृत्रिम बर्फ बनाने की मशीनें भी जंग खा चुकी हैं, इन मशीनों से आर्टिफिशियल बर्फ सिर्फ पर्यटन विभाग की फाइलों में ही बन पाई है धरातल पर आज भी सूखा पड़ा हुआ है, यही हाल ओपन आइस स्केटिंग रिंक औली का भी है जो वर्ष 2019 में तत्कालीन पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के उद्घाटन के बाद से बदहाल पड़ी हुई है, यहां भी पर्यटन महकमे की उदासीनता के कारण आज तक एक इंच आईस नहीं जम पाई है,क्षेत्र के पर्यटन विशेषज्ञ संजय कुंवर बताते हैं कि शीतकालीन पर्यटन स्थली औली के प्रति आज तक कोई भी सरकार संजीदा नजर नहीं आई जिसका उदाहरण आप देख सकते हैं कि 15वर्ष पूर्व यूरोप से आयातित आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग सिस्टम नन्दा देवी स्की स्लोप औली में इस उद्वेश्य से लगी कि जब कभी प्राकृतिक बर्फ की उपलब्धता औली में न हो सके तो ये करोड़ों की मशीनें कृत्रिम बर्फ बनाकर औली में नेशनल विंटर गेम्स और इंटर नेशनल स्की चैंपियनशिप कराने में मददगार साबित होंगे लेकिन ये दोयम दर्जे के उपकरण आज तक स्की स्लोप को लकदक नहीं कर सके और डेढ़ दशक से ये औली की ढलानों मे महज शो पीस बने हुए है यही हाल पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज जी के ड्रीम प्रोजेक्ट औली ओपन आइस स्केटिंग रिंक का भी है जो वर्ष 2019 में उद्घाटन के बाद से बदहाल पड़ी है 4 करोड़ रुपए फूंकने के बाद भी संबंधित विभाग आज तक इस रिंक में एक इंच आईस नहीं जमा सका ये आईस सिर्फ कार्य दाई संस्था की फाइलों में जम कर रह गई है, पर्यटकों के लिए औली में न तो शौचलय की उचित प्रबंध है और न पीने के पानी का कोई साधन नजर आता है, इस तरह आप कैसे इंटर नेशनल विंटर डेस्टिनेशन की बात कर सकते है, हां पीएम मोदी जी की मन की बात में इस विंटर डेस्टिनेशन औली के बारे में सुनकर जरूर देश विदेश के पर्यटक औली की और ज्यादा रुख करेंगे लेकिन वो जब यहां आकर पर्यटन अवस्थापन सुविधाओं की जमीनी हालात से अवगत होंगे तब क्या संदेश जाएगा बाहर ये भी सोचना जरूरी है, बर्फबारी और बारिश बिन विंटर डेस्टिनेशन औली में हालात इस कदर खराब हो रखे हैं कि चारों तरफ बुग्यालों में सूखी धूल उड़ती नजर आ रही है,अगर ये स्नो मेकिंग सिस्टम आज काम कर जाते तो क्षेत्र में शीतकालीन पर्यटन कारोबार परवान चढ़ता और औली का नाम अंत राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी तेजी से उभरता।

बॉक्स में

” 15वर्ष पूर्व यूरोप से आयातित आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग सिस्टम नन्दा देवी स्की स्लोप औली में इस उद्वेश्य से लगी कि जब कभी प्राकृतिक बर्फ की उपलब्धता औली में न हो सके तो ये करोड़ों की मशीनें कृत्रिम बर्फ बनाकर औली में नेशनल विंटर गेम्स और इंटर नेशनल स्की चैंपियनशिप कराने में मददगार साबित होंगे लेकिन ये दोयम दर्जे के उपकरण आज तक स्की स्लोप को लकदक नहीं कर सके और डेढ़ दशक से ये औली की ढलानों मे महज शो पीस बने हुए है”।
संजय कुंवर
पर्यटन विशेषज्ञ

“विंटर डेस्टिनेशन औली में शीतकालीन पर्यटन सीजन की आमद बर्फबारी पर टिकी है, बर्फबारी समय पर होने से पर्यटक स्कीइंग से लेकर अन्य गतिविधियों से हमे अच्छा रोजगार देते हैं, अगर ये कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों से बर्फ जमती तो हमें दिसंबर से ही रोजगार मिल जाता।”
जयदीप भट्ट
स्थानीय पर्यटन
प्रशिक्षित युवा

“औली सहित पूरे क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश नहीं होने से खासा चिंतित है, उनका कहना है कि पिछले 15सालों का आंकड़ा देखे तो कई बार औली बर्फ विहीन रही है,तब हमें ही सबसे ज्यादा कारोबार का नुकसान हुआ है,सरकार किसी की भी रही हो कोई भी औली में पर्यटन विकास को लेकर संजीदा नहीं रहा”।
महेंद्र भुजवान
ब्लॉक अध्यक्ष यू के डी


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