सर्दियों में जोड़ों व मांसपेशियों के दर्द से बचाव पर दी फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जयदेव सिंह ने सलाह.
देहरादून।
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस, सर्वाइकल व लंबर स्पॉन्डिलोसिस, कमर दर्द, सायटिका और फ्रोजन शोल्डर से पीड़ित मरीजों को इस दौरान अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दर्द के साथ जोड़ों में अकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई आम समस्या बन जाती है।
सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जयदेव सिंह के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर में वेसोकंस्ट्रिक्शन (रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना) होता है, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है। इसके कारण जोड़ों में जकड़न और मांसपेशियों में ऐंठन (मसल स्पाज्म) बढ़ जाती है। इसके साथ ही सर्दियों में विटामिन-डी और विटामिन-बी12 की कमी भी तेजी से देखने को मिलती है, जो दर्द और कमजोरी को बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनती है। शारीरिक गतिविधि कम होने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और समस्या और गंभीर हो सकती है।
डॉ. सिंह बताते हैं कि विटामिन-डी की कमी से हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और जल्दी थकान महसूस होती है, जबकि विटामिन-बी12 की कमी से हाथ-पैरों में झनझनाहट, नसों में दर्द, सुन्नपन और संतुलन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सर्दियों में धूप कम मिलने और खान-पान की अनदेखी के कारण इन विटामिन्स की कमी और बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की समस्याओं में फिजियोथेरेपी एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार पद्धति है। फिजियोथेरेपी के अंतर्गत हॉट थैरेपी, अल्ट्रासाउंड, इंटरफेरेंशियल थैरेपी के साथ-साथ स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज कराई जाती हैं, जिससे दर्द में कमी आती है और जोड़ों की कार्यक्षमता बनी रहती है।
डॉ. जयदेव सिंह के अनुसार, मरीज घर पर भी कुछ सावधानियां अपनाकर राहत पा सकते हैं। रोज सुबह हल्की स्ट्रेचिंग करें, दिन में एक से दो बार गर्म पानी से सिकाई करें, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें और घुटनों व कमर को ठंड से सुरक्षित रखें। दर्द बढ़ने पर स्वयं दवाइयां लेने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि रोजाना सुबह 15–20 मिनट धूप में बैठना चाहिए, जिससे विटामिन-डी का स्तर बढ़ता है। आहार में दूध, दही, अंडा, मछली और हरी सब्जियों को शामिल करें। विटामिन-बी12 के लिए दूध, दही, पनीर और अंकुरित अनाज लाभकारी होते हैं। साथ ही सही पोश्चर अपनाना और नियमित हल्की एक्सरसाइज करना भी बेहद आवश्यक है।
समय रहते फिजियोथेरेपी और सही देखभाल अपनाकर सर्दियों में होने वाले जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
