चमोली
*राजराजेश्वरी चंडिका देवी की यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह का वातावरण, पहले पड़ाव पर देवी पहुंचेगी रतूड़ा गांव*
बैनातोली मण्डप में दैनिक नित्य पूजा के बाद राजराजेश्वरी चण्डिका देवी यात्रा पर बुधवार को निकल पड़ी है। बुधवार प्रातः से ही राजराजेश्वरी चण्डिका देवी यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह बना हुआ था। दूर दराज गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे।

यात्रा के निमित्त एक माह से प्रशिक्षित ऐरवालें देवी नृत्य में दक्ष एवं बालदेव के संवाहक पारेश्वर कण्डवाल का देवी यात्रा के निमित्त मुण्डन व अभिषेक स्नान कराकर वैदिक विधिविधान से यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया व देवी के सम्मुख पूरी निष्ठा व श्रद्धा से देवी कार्य को सम्पादित करने के लिए उन्हें दीक्षा दी गई तथा सांयकाल से यात्रा के सम्वाहक की शक्तिकरण की पूजा रात्रिभर चली।

यह ब्रह्म मूलरूप से पुरूष का रूप व देवी को प्रकृति का रूप माना जाता है इसके ऊपरी भाग में बाँस से निर्मित डोली में दिव्य औषधि व जड़ी बूटियों से अभिमंत्रित ब्रह्माण्ड की परिकल्पना चौदह भुवनों की स्थापित इसके निमित्त ऊपरी भाग में महाकाली, महालक्ष्मी, माँ सरस्वती के त्रिगुणात्मक स्वरूप देवियों की प्रतिमा के रूप में स्थापित किया गया।
सभी धार्मिक अनुष्ठानों के बाद यात्रा के सम्वाहक ब्रह्म गणाईं पण्डित विश्वम्भर दत्त सती द्वारा भ्रमण हेतु तैयार किया गया ब्रह्म यात्रा हेतु बाहर आते ही बहुत से देवी देवता अवतरित हो गए, गणाईं द्वारा ब्रह्म ऐरवालों के पास देकर तथा पुजारी गैरोला देवी के फर्स को ऐरवालों के पास देते ही ब्रह्म ने देवी के साथ मंदिर की परिक्रमा की और परम्परानुसार दूसरे प्रहर की पूजा के पश्चात अपनी यात्रा सिमली बाजार, पैट्रोल पंप, आटागाड़, फुरकीधार के विषम विकट पुराने पैदल मार्गों से होते हुए प्रथम पड़ाव रतूड़ा के लिए प्रस्थान कर गये।
