अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई जांच पर भी नहीं थमा विवाद, वीआईपी फोकस को लेकर कांग्रेस का हमला
देहरादून।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद भी उत्तराखंड की राजनीति में उबाल थमता नजर नहीं आ रहा है। सरकार को उम्मीद थी कि सीबीआई जांच की घोषणा से जनता का आक्रोश कम होगा, लेकिन जांच के कथित दायरे को लेकर अब कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
दरअसल, सीबीआई जांच का फोकस उस तथाकथित ‘वीआईपी’ पर होने की बात सामने आते ही कांग्रेस ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि अगर जांच केवल वीआईपी तक सीमित रही, तो यह न्याय के साथ समझौता होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष अब सरकार की घेराबंदी कर रहा है।
अंकिता के माता-पिता की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात और उसके बाद सीबीआई जांच की सिफारिश की घोषणा के बाद यह मामला एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया है। हालांकि, जांच के बिंदुओं को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने ईटीवी भारत से बातचीत में साफ कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए शुरू हुआ आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को प्रस्तावित बंद का आह्वान अब भी कायम है और इसमें सभी संगठन व राजनीतिक दल शामिल रहेंगे।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार को भेजा गया सीबीआई जांच की सिफारिश वाला पत्र सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होगा कि जांच केवल वीआईपी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले में शामिल सभी दोषियों तक पहुंचेगी। कांग्रेस का आरोप है कि रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने और सबूतों को प्रभावित करने वाले लोग भी उतने ही दोषी हैं, जितना कि वह कथित वीआईपी, जिसका नाम शुरू से इस मामले में सामने आता रहा है।
फिलहाल, सीबीआई जांच का दायरा क्या होगा और जांच किस स्तर तक पहुंचेगी, इस पर सस्पेंस बरकरार है, वहीं राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही।
