बाणों के साथ अलकनंदा नदी में गंगा स्नान को जाते पांडव, तथा जल यात्रा में शामिल महिलाएं

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बाणों के साथ अलकनंदा नदी में गंगा स्नान को जाते पांडव, तथा जल यात्रा में शामिल महिलाएं

चमोली 

पांडव लीला के दसवें दिन पांडव अपने बाणों (अस्त्र शस्त्र) के साथ गंगा स्नान के लिए गांव से दो किलोमीटर दूर नंगे पांव अलकनंदा नदी के तट नारायण घाट पर गये। बाणों के साथ स्नान किया। और अपने पितरों के मोक्ष हेतु यज्ञ के साथ तर्पण दिया गया। तत्पश्चात मौजूद महिलाओं ने नदी का पवित्र जल अपने कलशों में भर कर पांडवों के साथ लक्ष्मी नारायण मंदिर में जाकर पूजा व परिक्रमा की।
पूजा अर्चना व परिक्रमा करने के बाद सभी कीर्तन भजन के साथ पूर्व की भांति बहुगुणा लोगों के भवन पर जाकर उन्हें आशीष देते हुऐ पांडव चौक में पहुंचे। जहां पर पांडव नृत्य के साथ महिलाओं ने अपने जल कलशों को नारायण वृक्ष सांवला पेड़ के चारों तरफ पूजा के लिए रखे गए। रात को गांव के हर परिवार से लाये गये छावड़ी का भोग नारायण भगवान को कराने के बाद जल कलशों की पूजा और बाणों का अपने मूल स्थान नारायण मंदिर में विराजमान हो जाने के बाद गांववासियों को पांडव लीला समिति द्वारा सामुहिक भोज कराया गया। कल 11 दिन सांवला वृक्ष को नारायण के पाश्र्व किशन लखेड़ा के घर पहुंचा कर सभी को नारायण प्रसाद वितरण के साथ पांडव लीला संपन्न हो जायेगी।


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