कौठियालसैंण/ चमोली
चमोली के कौठियालसैण में 38 वें वर्ष की भव्य रामलीला: तीसरे दिन सीता स्वयंवर का रोमांचक मंचन – भगवान राम ने तोड़ा शिव धनुष, परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा अद्भुत समां

गोपीनाथ के हिमालयी वादियों में बसे शांतिपूर्ण कौठियालसैंण में आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित 38 वें वर्ष की श्री रामचरितमानस आधारित* *रामलीला का मंचन पूरे धूमधाम से चल रहा है। यह परंपरा गत 38 वर्षों से ग्रामीण सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हुए भक्तों में भक्ति भावना का प्रसार कर रही है। दीपावली के एक महिने बाद ओर पावन अवसर के बाद* *आयोजित इस रामलीला में इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र मुख्य पात्रों का जीवंत अभिनय है, जिसमें भगवान राम का

अभिनय* *दीपक झिंक्वाण, लक्ष्मण के पात्र का अभिनय ऋषभ नेगी मात सीता रिया राणा और राजा जनक के पात्र यशवंत फर्स्वाण और* *भगवान परशुराम के पात्र प्रशांत सजवाण निभाए जा रहे हैं। यह नवीन पहल लैंगिक समानता एवं* *सशक्तिकरण की भावना को मजबूत करने वाली है, जो शहरी एवं ग्रामीण स्तर पर एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत कर रही है।*

*रामलीला का मंचन 23 नवंबर 2025 से प्रारंभ होकर 1 दिसंबर 2025 को समापन होगा। तीसरे दिन (25 नवंबर 2025) का मुख्य आकर्षण **सीता स्वयंवर*का भव्य मंचन रहा, जिसमें गोस्वामी तुलसीदास के बालकांड के अनुसार* *जनकपुर के राजा जनक के दरबार में घटनाओं का जीवंत चित्रण किया गया। रात्रि 9:00 बजे से 12:30 बजे तक चले इस दृश्य ने सैकड़ों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम एवं आकर्षण
– **राम-लक्ष्मण का भव्य आगमन**: *गुरु विश्वामित्र के साथ भगवान राम एवं *लक्ष्मण का जनकपुर प्रवेश, जो ध्वनि-प्रकाश प्रभावों से सज्जित था। दर्शकों ने “जय श्री राम” के उद्घोषों से माहौल को भक्तिमय बना दिया।*
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– **रावण का प्रवेश एवं चेतावनी**: *लंका नरेश *रावण भी स्वयंवर में पहुंचा, किंतु भविष्यवाणी के कारण उसे लौटना पड़ा। जाते-जाते रावण ने क्रोधपूर्ण चेतावनी दी– *”जो भी सीता को ले जाएगा, मैं उसे हर लूंगा!”* *यह दृश्य रावण के अहंकारी स्वभाव को उजागर करते हुए दर्शकों में उत्सुकता जगाने वाला रहा।
– **शिव धनुष भंग का चरमोत्कर्ष**: *सैकड़ों *राजकुमारों के असफल प्रयासों के बाद भगवान राम ने सहज भाव से प्राचीन शिव धनुष को उठाया और “टंक” की ध्वनि के साथ उसे दो* *टुकड़ों में तोड़ दिया। तत्काल तीनों लोकों में गूंज उठी – पृथ्वी, आकाश, यक्ष, किन्नर एवं शेषनाग सभी ने लक्ष्मण के निर्देश पर शांत रहते हुए इस पावन क्षण का साक्ष्य दिया। धनुष भंग के साथ ही माता सीता ने* *भगवान राम को वरमाला पहनाई, तथा राम-सीता का भावपूर्ण विवाह संपन्न हुआ।*
– **परशुराम-लक्ष्मण का ऐतिहासिक संवाद**: *विवाह के पश्चात अचानक क्रोधोन्मत्त परशुराम जी का दरबार में प्रवेश। शिव धनुष टूटा देख वे आक्रोशित हो उठे। युवा लक्ष्मण ने साहसपूर्वक उनका सामना किया, तथा पूरे **एक घंटे तक चले इस तेजस्वी संवाद** *ने मंच पर अद्भुत समां बांध दिया। लक्ष्मण के तीखे कथन*
*”क्षत्रिय कुल के कुलदीपक होकर, कुलिश से डरते हो?”* *ने दर्शकों में तालियों की गड़गड़ाहट पैदा कर दी। अंततः भगवान राम के शांत संयम से परशुराम शांत हुए, जो राम के धैर्य की महिमा को दर्शाता रहा।*
*इस वर्ष का यह मंचन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा क्योंकि मुख्य पात्रों के अभिनय में महिलाओं की भागीदारी ने न केवल सांस्कृतिक विविधता जोड़ी, अपितु युवा पीढ़ी को प्रेरित भी किया। रामलीला में प्रयुक्त जीवंत संगीत, पारंपरिक नृत्य, 3D प्रकाश प्रभाव एवं ध्वनि प्रणाली ने हिमालयी शहरी एंव ग्राम के सादे माहौल को रंगीन बना दिया। लगभग **5,00 से अधिक दर्शक** *उपस्थित रहे, *जिनमें महिलाएं एवं बच्चे विशेष संख्या में थे। दर्शकों के लिए विशेष बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण एवं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

*आदर्श रामलीला कमेटी कोठियालसैंण के अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह गडोरिया ने बताया, *”38 वर्षों की यह परंपरा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरण एवं नैतिक मूल्यों के प्रसार का माध्यम बन चुकी है। महिलाओं द्वारा मुख्य पात्रों का अभिनय हमारी ग्रामीण संस्कृति में नारी शक्ति की प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है। कल का सीता स्वयंवर दृश्य दर्शकों के हृदय में अंकित हो गया, तथा परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने युवाओं में साहस एवं संयम की सीख दी।
*यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव है, अपितु गोपीनाथ की तलहटी में बसा कोठियालसैण हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। सभी भक्तों, प्रबुद्ध नागरिकों, साहित्यकारों एवं मीडिया बंधुओं से सादर अनुरोध है कि इस पावन लीला में पधारकर इसे सफल बनाने में सहयोग करें। कोठियालसैंण की यह रामलीला उत्तराखंड की* *सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर उजागर करने का माध्यम बनेगी।*
