सिमलसैंण गांव के नृसिंह स्वामी मंदिर में पौराणिक एवं ऐतिहासिक “वीर नृत्य” का आयोजन, देवी- देवताओं के पश्वा हुए अवतरित।
चमोली।
बुधबार से चल रहे तीन दिवसीय विभिन्न वीरों द्वारा वीर नृत्य के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को सिमलसैंण गांव में पौराणिक नृत्य में दूसरे दिन भी विभिन्न देवी- देवताओं के पश्वा अवतरित हुए ।
सिमलसैंण गांव के पौराणिक नृसिंह मंदिर प्रांगण में वीर नृत्य का आयोजन लगभग 6 वर्षों के बाद किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं
वीर नृत्य देवभूमि उत्तराखंड के रैवासियों की पौराणिक एवं ऐतिहासिक संस्कृति और लोक परम्परा का एक नृत्य हैं, जिसमें सभी ग्रामीण तथा उनके परिजन एकत्रित होते हैं, जिसमें जागर गायक,घटोया देवी- देवताओं की कहानियां जागर, लगाकर और पहाड़ी वाद्ययंत्र डोर -थाली, बजाकर ग्रामीणों पर देवी देवताओं के पश्वा अवतरित करते हैं तथा जिसमें ढौल वादक,ढौल- दमाऊं,बजाकर और हनुमान चालीसा पढ़कर उनका साथ देते हैं।
यह आयोजन समस्त ग्रामीणों तथा क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए किया जाता हैं जिसमें बड़ी संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और जो यहां सच्ची श्रद्धा से आते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती हैं।
वीर नृत्य में भगवान नृसिंह स्वामी, वीरभद्र,मां भगवती, हनुमान,वीर मेहमन्त,64 काली,78 भैरव,52 वीर,समेत अनेक देवी -देवताओं के पश्वा अवतरित होते हैं जो उपस्थित श्रद्धालुओं को भभूती लगाकर आशीर्वाद देते हैं
आज वीर नृत्य के अन्तिम दिवस पर मां भगवती और मां काली की अवतरित पश्वा महिलाएं वीर देवताओं को चना, मटर,भट्ट,गुड़-मिठाई,रूट-पूआ,फल आदि अपने हाथों से खिलाकर गगरी से पानी पिलाते हैं। वही दिगंबर प्रसाद चंदोला व नवल किशोर मिश्रा द्वारा पूजा अर्चना की जा रही है देव नृत्य में वासुदेव चंदोला नर्सिंग के केदारनाथ चंदोला भगवती राकेश चंदोला भैरव वाष्पानंद चंदोला हनुमान परमानंद चंदोला मेहमंत के पश्वा अवतरित हुए ओर भक्तों को आशीर्वाद दिया,अनुष्ठान में विनोद चंदोला, गिरीश चंदोला, नवीन चंदोला,नरेश चंदोला सहित गांव के सभी लोग अनुष्ठान को सफल बनाने में जुटे हुए है ।
