मकर संक्रांति का त्योहार पारिवारिक एकता, सामाजिक सद्भावना, और नई शुरुआत का प्रतीक है-ललित जोशी
देहरादून।
मकर संक्रांति के अवसर पर, लोग अपने घरों को साफ करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, और अपने प्रियजनों के साथ समय बिताते हैं। यह त्योहार भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, लेकिन इसका मूल अर्थ और महत्व एक ही रहता है।
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज देहरादून में खिचड़ी पर्व का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और परंपराओं को प्रोत्साहित करना और विद्यार्थियों के बीच आपसी सहयोग और सौहार्द बढ़ाना था। कार्यक्रम में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने सभी को मकर संक्रांति की बधाई देकर किया। और छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बीच खिचड़ी वितरित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है, जो न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश भी देता है। आज के दिन से हमारे त्योहारों की शुरुआत होती है, और यह सकारात्मकता तथा नई ऊर्जा का संचार करता है।
खिचड़ी कार्यक्रम में उत्तराखण्ड़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जे.एम.एस. राणा, यूसर्क की निदेशक डॉ. अनीता रावत , संयुक्त निदेशक विधि गिरीश चंद्र पंचोली, असिस्टेंट डायरेक्टर जीएसटी, इंस्पेक्टर संजय उप्रेती भी मौजूद रहे। प्रो. राणा ने सभी को मकर संक्रांति की बधाई दी और कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद से भरपूर इस खिचड़ी ने सभी का मन मोह लिया। ऐसे आयोजनों से हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का मौका मिलता है।
इस अवसर पर संस्थान के सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
