वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैज्ञानिक चिंतन भी आवश्यक: सारस्वत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चमोली( गौचर) में विज्ञान दिवस का आयोजन किया गया l

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैज्ञानिक चिंतन भी आवश्यक: सारस्वत
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चमोली( गौचर) में विज्ञान दिवस का आयोजन किया गया l

चमोली

शुक्रवार को हुऐ इस कार्यक्रम में डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा विज्ञान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना था। साथ ही प्रश्नोत्तरी व भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। अंत में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें सभी प्रशिक्षुओं ने विज्ञान के साथ अपनी कला का परिचय दिया l कार्यक्रम की दूसरे चरण में विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर अपनी बात रखते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य आकाश सारस्वत में कहा कि आज हमें हर कार्य के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैज्ञानिक चिंतन भी आवश्यक है , हमें आज के दौर में आगे बढ़ना है तो नए-नए अनुसंधान करने होंगे , जिसका लाभ भावी पीढ़ियों को मिल सके , भारत विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर उन्नति कर रहा है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कोरोना के समय का है जिसमें वैक्सीन विकसित करने में भारतीय वैज्ञानिकों ने अग्रणी योगदान दिया था l
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाए जाने के उद्देश्यों पर बात रखते हुए वरिष्ठ संकाय सदस्य रविंद्र सिंह बर्त्वाल ने कहा कि भारत के छात्र छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि जागृत करना, विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए प्रेरित करना तथा विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है।


इस अवसर पर डायट प्रवक्ता रविन्द्र सिंह बर्त्वाल गोपाल प्रसाद कपरूवाण , सुबोध कुमार डिमरी, भगत सिंह कंडवाल , नीतू सूद, बच्चन जितेला के साथ पवन गौड़ , हर्षवर्धन गौड़, राहुल कुमार, गौरव जोशी एवं समस्त डीएलएड प्रशिक्षु मौजूद रहे।


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