उत्तरकाशी में बर्फबारी से सेब उत्पादकों के खिले चेहरे, अच्छी फसल की उम्मीद ।
उतरकाशी
उत्तरकाशी जिले में लंबे इंतज़ार के बाद हुई बर्फबारी ने किसानों, खासकर सेब उत्पादकों के चेहरों पर रौनक लौटा दी है। सीजन की पहली बर्फबारी से सेब के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरे होने की उम्मीद जगी है, जो बेहतर उत्पादन के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
पिछले करीब चार महीनों से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए थे। इससे फसलों के प्रभावित होने की आशंका को लेकर काश्तकार चिंतित थे। विशेष रूप से सेब उत्पादक बारिश और बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, जो अब पूरा हो गया है।
बीते दिनों हुई बर्फबारी से रवांई घाटी की प्रसिद्ध स्योरी फल पट्टी बर्फ की सफेद चादर से ढक गई है। स्योरी क्षेत्र के साथ ही कफनौल के मुरालटु गांव में एक से सवा फीट तक बर्फ गिरने की जानकारी किसानों ने दी है। काश्तकारों का कहना है कि यह बर्फबारी सेब की फसल के लिए संजीवनी साबित होगी।
कृषकों के अनुसार बारिश और बर्फबारी से न केवल सेब, बल्कि मटर, गेहूं और आलू जैसी रबी फसलों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। पर्याप्त नमी मिलने से फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन में इजाफा होने की उम्मीद है।
उत्तरकाशी जिले में करीब 25 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है. उधर, आराकोट बंगाण के साथ ही सांकरी क्षेत्र में बर्फबारी होने से सेब उत्पादकों को काफी राहत मिली है. सेब उत्पादकों का कहना है कि सेब की फसल के लिए चिलिंग आवर्स का पूरा होना काफी जरूरी होता है. ऐसे में जहां बर्फबारी हुई है, वहां पर चिलिंग आवर्स के पूरा होने की उम्मीद है ।
बर्फबारी के बाद पूरे क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है, वहीं पहाड़ों की सफेदी ने पर्यटन गतिविधियों को भी नई ऊर्जा दी है। बर्फबारी के दूसरे दिन दयारा बुग्याल ट्रैक पर्यटकों से गुलजार रहा। शनिवार को प्रशासन द्वारा ट्रैक खोलने के बाद रैथल और बार्सू पहुंचे पर्यटकों ने बुग्याल में बर्फ का जमकर आनंद लिया।
करीब दो से तीन फीट बर्फ के बीच ट्रैकिंग का रोमांच पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहा। बसंत पंचमी और के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटक जनपद पहुंचे। शुक्रवार को बर्फबारी के चलते सभी ट्रैक बंद थे, लेकिन खुलते ही सबसे अधिक ट्रैकर्स दयारा बुग्याल के दीदार को पहुंचे।
