धराली आपदा को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे दाव।जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं – कांग्रेस

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धराली आपदा को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे दाव।जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं – कांग्रेस

देहरादून।

विगत दिवस उत्तराखण्ड़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व अध्यक्ष एवं सीडब्लूसी सदस्य करन माहरा के संयुक्त नेतृत्व में उत्तराखण्ड कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने धराली जा कर वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया और पाया कि धराली को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। जिसको लेकर शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन देहरादून में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व अध्यक्ष, सीडब्लूसी सदस्य करन माहरा ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर धराली का आंखों देखा हाल विस्तृत तौर से सांझा किया।
गोदियाल ने कहा कि सरकार द्वारा मृत लोगों की संख्या जो बताई जा रही है वह विरोधाभासी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने धराली आपदा को लेकर 67 लोगों को मृत या गुमशूदा बताया सरकार में दायित्वधारी मंत्री कर्नल कोठियाल ने 147 के मलवे में दबे होने का बयान दिया और अब राज्य सरकार की ओर से जो सफाई आई है उसमें 52 लोग गायब या मृत बताए जा रहे है। गोदियाल ने कहा कि सरकार इस विरोधाभास को दूर करे और प्रदेश की जनता विपक्ष और मीडिया के समक्ष सच लाए, क्योकि आपदा राहत और बचाव ये कोई मजाक या राजनीति करने के मुद्दे नही ब्लकि मानवीय आधार है।
गोदियाल ने बताया कि उत्तराखण्ड कांग्रेस की फैक्ट फाईडिंग टीम (प्रतिनिधि मण्डल ) ने पाया कि आपदा को चार माह बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा ना तो धराली में पुनर्वास पुनर्निर्माण राहत , विस्थापन इत्यादि जन जीवन को पटरी पर लाने के लिए कोई कारगर कदम नही उठाया गया है, किसी भी क्षेत्र में कोई पहल नही कि गई है।
गोदियाल ने कहा कि सरकार के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
धराली की वास्तविक स्थिति बेहद भयावह है स्थानिय आपदा प्रभावितों के अनुसार 250 नाली नाप की जमीन सम्पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। धराली में 112 आवासीय मकान व लगभग 70 होटल रिसॉर्ट होमस्टे प्रभावित हुए हैं जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार धराली में केवल कुछ ही लोगों को मुआवजा दिया गया है।
प्रत्यक्ष दर्शीयों के अनुसार स्थानीय लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हैं शवों को निकालने तक के उचित प्रयास नहीं किए गए। राहत कार्य शून्य है। किसी तरह कि कोई गतिविधि नही देखी गई। न कही फोर्स , कोई प्रशासनिक इकाई नही, कोई सुध लेने वाला नही ।
गोदियाल ने कहा कि धराली में आपदा पीडित एक महिला ने मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली है। बाजार पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। वहां होने वाले उत्पाद सेब राजमा आलू की देश और दुनिया में डिमांड है लेकिन बाजार के आभाव में उनके उत्पादों का वीपणन नही हो पा रहा है। उनके अनुसार 112 लोगों को 5 लाख रूपये की सहायता की गई है। लेकिन उसमें भी 38 लोगों को यह कह कर छोड दिया गया है कि आपके मकान पूरी तरह से नष्ट नही हुए है। जबकि सच्चाई यह है कि जो मकान वहां खडे भी है वो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए है और उनकी निचली मंजिल मलवे में दब गई है। सरकारी सहायता के आभाव में मजदूर लगा कर वो लोग स्वयं अपने खर्चे पर मलवे को हटाने का काम करवाने को मजबूर है।
कहा कि कांग्रेस हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है और तब तक संघर्ष करेगी जब तक धराली दोबारा अपने पैरों पर खड़ा न हो जाए। प्रेसवार्ता के दौरान गरिमा मेहरा दसौनी मौजूद रही।


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