उद्धव और कुबेरी की डोली पाण्डुकेश्वर पहुंची
शंकराचार्य की पवित्र गद्दी आज ज्योर्तिमठ नृसिंह मंदिर पहुंचेगी
ज्योतिर्मठ/चमोली
25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ साल 2025 की चारधाम यात्रा संपन्न हो चुकी है. चारों धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं. वहीं अब श्री बदरीनाथ जी के बद्रीश पंचायत में अग्रज देवतागण उद्धव जी और कुबेरजी पांडु नगरी पांडुकेश्वर में अपनी शीतकालीन गद्दी पर विराजमान हो गए है।
इस शीतकाल के लिए भू बैकुंठ नगरी श्री बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलम होने के बाद आज बुधवार को भगवान बदरी विशाल जी के बालसखा उद्धवजी और देवताओं के खजांची कुबेर जी पांडुकेश्वर में अपनी शीतकालीन गद्दी पर विराजमान हो गए है. जहां उद्धव जी योग-ध्यान बदरी मंदिर और कुबेरजी अपने मूल मंदिर में विराजमान हुए. वहीं आद्य गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी गुरुवार को ज्योर्तिमठ स्थित पौराणिक मठागण नृसिंह मंदिर पहुंचेगी।
बुधवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद उद्धवजी, कुबेरजी और शंकराचार्य जी की गद्दी श्री बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधा कृष्ण थपलियाल की अगुआई में पांडुकेश्वर पहुंची. यहां स्थानीय ग्रामीणों के साथ कुबेर देवरा समिति पांडुकेश्वर ने पुष्प वर्षा कर देव प्रतीकों का स्वागत किया और बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी समेत धर्माधिकारी आदि का सम्मान किया गया।
