संरक्षण के अभाव में खंडहर बना टिहरी रियासत का राजगढ़ी महल ।

संरक्षण के अभाव में खंडहर बना टिहरी रियासत का राजगढ़ी महल ।

उत्तरकाशी

राजगढ़ी, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव ब्लॉक में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो बड़कोट से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान रंवाईं परगने का तहसील मुख्यालय भी रहा है। राजगढ़ी का यह महल टिहरी रियासत के शासनकाल में निर्मित दो मंजिला भवन था, जो अब देखरेख के अभाव में खंडहर में बदल चुका हैं ।

 

संरक्षण के अभाव में खंडहर बना टिहरी रियासत का राजगढ़ी महल ।
प्रसिद्ध साहित्यकार महाबीर रवालटा  के अनुसार यह महल गोरखा आक्रमण के बाद उसके प्रशासकों ने ढोल डांडे के अग्र समतल स्थल पर एक किले का निर्माण किया और इसका नाम ‘गोरखागढी’ रखा।जनश्रुतियों के अनुसार इसका निर्माण वहां के निकटवर्ती ग्रामीणों से ही कराया गया था। इस गढ़ी में डेढ़-दो सौ गोरखा सैनिक तैनात रहते थे और उन्हीं के द्वारा रवांई क्षेत्र पर शासन चलता था। सन् 1815 ई के बाद टिहरी रियासत द्वारा गोरखागढी का नाम बदलकर ‘राजगढ़ी’ रखा गया। राजगढ़ी टिहरी रियासत के समय रवांई परगने का मुख्यालय बना रहा। परगना मजिस्ट्रेट, तहसील, कानूनगो, पुलिस थाना कार्यालय एवं आवासीय भवनों का यहां निर्माण कराया गया। सन् 1972 ई में यहां से तहसील को बड़कोट स्थानांतरित कर दिया गया। राजगढ़ी का यह महल गढ़वाल के पश्चिमी क्षेत्र की देखरेख के लिए बनाया गया था, जहां राजा के प्रतिनिधि के रूप में एक बड़ा अहलकार निवास करता था。 इतिहास में, 30 मई 1930 को राजगढ़ी से लगभग 8 किलोमीटर दूर तिलाड़ी में एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जिसे तिलाड़ी कांड के नाम से जाना जाता है। इस घटना में, टिहरी रियासत के दीवान चक्रधर जुयाल के आदेश पर निहत्थे किसानों पर गोलीबारी की गई थी, जिसमें कई लोग मारे गए थे  लेकिन वर्तमान में, यह महल अपनी ऐतिहासिकता के बावजूद उपेक्षा का शिकार है और संरक्षण के अभाव में खंडहर में परिवर्तित हो गया है।