प्रधानमंत्री के श्रमिक हितैषी सुधार के दावों को झूठा बताते हुऐ सीटू ने धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया*

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गौचर / चमोली

*प्रधानमंत्री के श्रमिक हितैषी सुधार के दावों को झूठा बताते हुऐ सीटू ने धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “श्रमिक-हितैषी सुधार” के दावों को झूठा बताते हुए सीटू ने ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के निर्माण स्थल भट्टनगर में श्रम संहिताओं को समाज को पीछे धकेलने वाला कानून बताते हुए धरना प्रदर्शन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला दहन किया।


रेलवे लाइन के निर्माण स्थल पर श्रमिक संगठन के साथ आयोजित हुऐ धरना प्रदर्शन के बाद सीटू के जनपद चमोली के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी व महासचिव जितेन्द्र मल्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के श्रमिक – हितैषी के दावों को झूठा बताते हुऐ कहा कि यह भारतीय मजदूरों को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अंधकारमय दौर में ले जाएगा।
श्रम संहिताएं कार्यदिवस को 12 घंटे तक बढ़ाने की अनुमति देती हैं। ट्रेड यूनियन बनाने, मज़दूरों को अपनी मजदूरी के लिए सामूहिक सौदेबाजी करने और हड़ताल के अधिकार को लगभग असंभव बना देते हैं। भारत की मेहनतकश जनता ने ब्रिटिश राज के खिलाफ भी ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल का अधिकार हासिल किया था। मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को लागू कर देश की मेहनतकश जनता के साथ भारी विश्वासघात करके उन्हें मुनाफे के प्यासे कॉर्पोरेट घरानों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ने के लिए मजबूर कर दिया है।यह स्थायी रोजगार की व्यवस्था का अंत है।
श्रमिकों को सम्बोधित करते हुऐ उन्होने कहा कि जिससे आने वाली युवा पीढ़ियों का भविष्य भी बर्बाद हो जाएगा।
देश की बड़ी आबादी का रोजगार का मुख्य साधन कृषि था लेकिन पूरे देश में गहराते कृषि संकट के परिणाम स्वरूप आज कृषि घाटे का सौदा बनकर रह गई है। जिसके कारण पूरे भारत में बेरोजगारी के चरम पर है। इन जमीनी सच्चाइयों के विपरीत केन्द्र की सरकार ने चन्द देशी विदेशी कॉरपोरेट व पूंजीपति घरानों को बेतहाशा मुनाफा बटोरने के लिए मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा निचोड़ने की खुली छूट देने के लिए इन श्रम संहिताओं को लागू किया है।
उन्होंने कहा कि सीटू की मांग है कि मोदी सरकार तुरंत इन प्रतिगामी श्रम संहिताओं की अधिसूचना को वापस ले और मजदूरों व युवाओं से माफी मांगे।
केंद्रीय ट्रेड यूनियन समन्वय समिति एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हम 26 नवंबर 2025 को लागू की गई इन मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं की प्रतियां जला कर विरोध प्रदर्शन के माध्यम से हम मोदी सरकार को सख्त चेतावनी देते हैं कि, इस देश की जनता उन्हें मजदूरों को गुलाम बनने की अनुमति नहीं देंगे।


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