नाम यमुनोत्री का, प्लानिंग कब होगी? ।
उत्तरकाशी।
यमुनोत्री विधानसभा का नाम देश-दुनिया की आस्था के बड़े केंद्र यमुनोत्री धाम से जुड़ा है, लेकिन धाम के समग्र विकास की तस्वीर आज भी अधूरी नजर आती है। राज्य गठन के बाद इस क्षेत्र से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं, चुनावी घोषणाएं भी हुईं, लेकिन यमुनोत्री धाम के लिए 20-30 साल की ठोस और दीर्घकालिक मास्टर प्लानिंग अब तक बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बन पाई।
जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक यात्री सुविधाओं, पैदल मार्ग, रात्रि विश्राम, पार्किंग, स्वच्छता, चिकित्सा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे हैं, लेकिन सवाल यह है कि कैमरे केवल घटना देखने के लिए हैं या स्मार्ट तीर्थ प्रबंधन के लिए भी?
सबसे बड़ी चिंता धाम में पर्याप्त रात्रि विश्राम व्यवस्था की है। जिस तीर्थ में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहां सीमित ठहरने की व्यवस्था पूरे यात्री प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है।
जरूरत केवल निर्माण की नहीं, बल्कि यमुनोत्री को संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने की है। पैदल मार्ग का आधुनिकीकरण, पर्याप्त विश्राम स्थल, स्वच्छता व कचरा प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा, घोड़े-खच्चरों का व्यवस्थित संचालन और डिजिटल भीड़ प्रबंधन के साथ स्थानीय आजीविका व पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक मास्टर प्लान जरूरी है।
आस्था कठिन हो सकती है, व्यवस्था नहीं।
अब सवाल यही है—अगले चुनाव में फिर वादे होंगे या यमुनोत्री धाम की समग्र विकास योजना घोषणा पत्र का हिस्सा बनेगी?