उद्धव जी कुबेर जी एवं आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी पहुंची योग बदरी पांडुकेश्वर।
देव डोलियों का जगह–जगह हुआ भव्य स्वागत
चमोली।
25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बुधवार को बदरीनाथ धाम से उद्धव जी एवं कुबेर जी की देव डोली तथा आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी धाम से शीतकालीन पूजा स्थल योग बदरी पांडुकेश्वर प्रस्थान हुई। सेना के बैंड की मधुर धुनों के साथ निकली इस दिव्य यात्रा का मार्गभर में श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया दोपहर में देव डोलियां पांडुकेश्वर पहुंच गयी।
यात्रा सुबह बदरीनाथ धाम से विधिवत प्रारंभ हुई। देव डोलियों के साथ चल रहे सैन्य बैंड ने यात्रा के सा मार्ग पड़ावों पर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों तथा तीर्थ पुरोहितों, पांडुकेश्वर में कुबेर देवरा समिति ने पुष्प वर्षा कर देव डोलियों का स्वागत किया।पांडुकेश्वर पहुंचने पर महिला मंगल दल के भजन-कीर्तन आयोजित किया।पारंपरिक ढोल-दमाऊ की थाप ने वातावरण को पूर्णतः धार्मिक बना दिया।
उद्धव जी कुबेर जी की देव डोली तथा आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी शीतकालीन पड़ाव योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचने पर, मंदिर समिति, हक-हकूकधारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने अगवानी कर पुजारी परमेश्वर डिमरी ने पूजा-अर्चना सम्पन्न कराई। उद्धव जी योगबदरी मंदिर पहुंचे तथा कुबेर जी पांडुकेश्वर स्थित अपने मंदिर में विराजमान हो गये।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि गुरुवार सुबह को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी पांडुकेश्वर से रावल धर्माधिकारी, वेदपाठी आचार्य एवं मंदिर समिति के अधिकारी कर्मचारी सहित ज्योर्तिमठ के लिए प्रस्थान करेंगे उसके पश्चात शीतकालीन पूजा और दर्शन की विधिवत शुरुआत की जाएगी।
देव डोली यात्रा के साथ रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान,प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेद पाठी रविंद्र भट्ट, दफेदार हरेंद्र कोठारी,विकास सनवाल सहित श्रद्धालुजन योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचे। इस अवसर पर कुबेर देवरा समिति सभी पदाधिकारी तथा प्रबंधक नवीन भंडारी तथा जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।