यमुनोत्री–गंगोत्री घाटी में बर्फबारी न होने से बढ़ी कोरी ठंड, स्थानीय लोग चिंतित
उत्तरकाशी
यमुनोत्री घाटी में इस वर्ष अब तक बर्फबारी न होने के कारण क्षेत्र में कोरी ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। आमतौर पर इस समय तक यमुनोत्री धाम की ऊँची पहाड़ियाँ बर्फ की सफेद चादर से ढकी रहती हैं, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं।
बर्फ न पड़ने से ऊँचाई वाले क्षेत्रों की पहाड़ियाँ काली और सूखी दिखाई दे रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि बर्फबारी न होने से न केवल ठंड का असर अलग तरह का महसूस हो रहा है, बल्कि इसका प्रभाव जल स्रोतों, खेती और पर्यावरण पर भी पड़ सकता है।
इसी तरह गंगोत्री घाटी में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहाँ भी ऊँची पहाड़ियों को अब तक बर्फबारी का इंतजार है। मौसम के इस असामान्य व्यवहार को लेकर स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यावरणविद् भी चिंतित हैं। गंगोत्री धाम में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तापमान माइनस 11 से माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के कारण भागीरथी नदी सहित केदार गंगा पूरी तरह जम चुकी है। अत्यधिक ठंड के चलते नदियों में मोटी बर्फ जम गई है और पानी बर्फ के बीच से संकरे नाले की तरह बहता दिखाई दे रहा है।
हालांकि पहाड़ों में हाल के दिनों में बारिश नहीं हुई है, इसके बावजूद तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। गंगोत्री धाम में साफ मौसम रहने के बावजूद हर दिन कड़ाके की ठंड का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के कनखू बैरियर इंचार्ज राजवीर रावत ने बताया कि अत्यधिक ठंड के बावजूद वन विभाग की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ शीतकालीन गश्त में जुटी हुई हैं। पार्क कर्मी समुद्रतल से करीब तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई तक गोमुख और केदारताल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में नियमित गश्त कर रहे हैं, ताकि दुर्लभ वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि माइनस डिग्री से भी नीचे तापमान में गश्त करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग की पूरी टीम लगातार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी बनाए हुए है और अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है।