आखिर क्यों रैणी आपदा ने बाद भी सरकार ने नहीं लिया सबक

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आखिर क्यों रैणी आपदा ने बाद भी सरकार ने नहीं लिया सबक

देहरादून।

देश के प्रथम गांव माना के समीप भारी बर्फबारी के बीच कुबेर पर्वत से मजदूरों के कैंप के ऊपर भारी हिमस्खलन होने से सरकार की चिंता बढ़ गई है। इस हिमस्खलन में बीआरओ के 55 मजदूर फंस गए थे जिन्हें बचाने की जद्दोजहद जारी है। लेकिन इस सब के बीच अब एक बार फिर विपक्षी दल सरकार पर हमला कर रहे हैं कि सरकार आपदाओं के बाद राज्य में इनसे निपटने के लिए कब उपयुक्त साधन तैयार करेगी।
सीमांत जनपद चमोली के माना गांव के समीप आई आपदा से राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। आपदा शुक्रवार को सुबह 5:00 से 6:00 बजे के बीच आई थी जिसमें 55 मजदूर भारी बर्फ के नीचे फंस गए थे। और 30 घंटे के बाद अभी तक भी 55 में से 50 मजदूरों को बाहर निकाला जा चुका है। जबकि पांच अभी भी लापता है और उन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। लेकिन इस आपदा के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि ऐसे संभावित आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में सरकार कब उपयुक्त संसाधन तैयार करेगी जिससे आपदा में रिस्पॉन्स टाइम कम किया जा सके और घटना के बाद राहत और बचाव के कार्य तेज गति से किया जा सके। आपको बता दें कि सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तो स्वयं मोर्चा संभाले हुए हैं। लेकिन जनपद के प्रभारी मंत्री डॉ धन सिंह रावत अभी तक किसी को नजर नहीं आए हैं। हिमस्खलन की इस घटना पर केंद्र भी नजर बने हुए हैं जिसमें राज्य सरकार और केंद्र सरकार की राहत बचाव एजेंसियां मिलकर इस रेस्क्यू अभियान को कंप्लीट करने में जुटी हुई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रेस्क्यू अभियान में जुटी बचाव एजेंसियां कल से आज तक विषम भौगोलिक चुनौतियों के बीच लगातार रेस्क्यू कार्य कर रही है। सीएम ने कहा कि इन मजदूरों को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा की जिसके सफल परिणाम भी दिखने लगे।
कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री की तारीफ तो की जा रही है जो स्वयं मोर्चे पर डटे हुए है। लेकिन साथ ही कांग्रेस सरकार के कार्यों पर सवाल उठा रही है कि इस क्षेत्र में रैणी आपदा के बाद भी सरकार कोई सबक नहीं ले रही है। सरकार के द्वारा आपदा से बचाव के लिए योजनाएं तो बनाई जाती है लेकिन यह योजना दीर्घकालीन नहीं है की कैसे निकट भविष्य में आपदाओं से बचने का काम किया जा सकता है।
चमोली जनपद के सीमांत गांव के समीप आई बर्फीली आपदा ने सरकार की चिंता जरूर बढ़ा दी। बाबजूद सरकार का प्रशासनिक अमला इन आपदाओं से कोई सबक नहीं ले रहा है।और यहीं वजह है कि आपदाएं से आ रही है लेकिन उसमें रिस्पॉन्स टाइम कम नहीं हो पा रहा है।


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