12,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर में झुकाव के संकेत पांच वैज्ञानिकों की टीम करेगी संरचनात्मक उपचार

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तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण की जिम्मेदारी सी बी आर आई को

वैज्ञानिक तकनीक से होगा 1000 साल पुरानी धरोहर का संरक्षण

12,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर में झुकाव के संकेत

पांच वैज्ञानिकों की टीम करेगी संरचनात्मक उपचार

देहरादून।

विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में शामिल उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित लगभग एक हजार वर्ष पुराने तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। मंदिर की संरचना में झुकाव के संकेत मिलने के बाद केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की को इसके वैज्ञानिक संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आधुनिक तकनीकों की मदद से मंदिर की मजबूती बढ़ाई जाएगी, जबकि इसके मूल स्वरूप, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार समय, भारी बर्फबारी, भूकंपीय गतिविधियों और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण मंदिर की संरचना में हल्का झुकाव देखा गया है। इसके बाद सी बी आर आई के वैज्ञानिकों ने मंदिर का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण, संरचनात्मक विश्लेषण और वैज्ञानिक परीक्षण किया। अध्ययन के आधार पर संरक्षण की विशेष योजना तैयार की गई है।
संस्थान के अनुसार संरक्षण कार्य के दौरान मंदिर की नींव, पत्थरों की स्थिति, भार संतुलन और झुकाव का गहन विश्लेषण किया जाएगा। आवश्यकता अनुसार पत्थरों को क्रमवार निकालकर उन पर जमी काई (एल्गी) हटाई जाएगी, प्रत्येक पत्थर की कोडिंग की जाएगी तथा ग्राउंड स्टेबिलिटी का परीक्षण करने के बाद उन्हें मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल मॉनिटरिंग और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न होगी।
CBRI के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने बताया कि अगस्त 2025 में संस्थान से संपर्क किया गया था। वर्तमान में पांच वैज्ञानिकों की टीम इस परियोजना पर कार्य कर रही है, जिसका नेतृत्व डॉ. मनोजीत सामंता कर रहे हैं। टीम में डॉ. देवदत्ता घोष, डॉ. हिना गुप्ता, शशांक और श्रीनिवास भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में लगभग ढाई डिग्री का झुकाव दर्ज किया गया है, जबकि विस्तृत अध्ययन के बाद आवश्यक संरक्षण उपाय किए जाएंगे।
गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की पूर्व रिपोर्ट में मंदिर परिसर की कुछ छोटी संरचनाओं में अधिक झुकाव दर्ज किया गया था। अत्यधिक ऊंचाई, चट्टानों के खिसकने और भूकंपीय गतिविधियों को इसके प्रमुख कारणों में माना गया है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार और ए एस आई ने मंदिर को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तुंगनाथ मंदिर का यह वैज्ञानिक संरक्षण न केवल देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा, बल्कि भविष्य में अन्य प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण के लिए भी एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।


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