गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर, लैंसडौन में त्रिभाषी शब्दकोश का हुआ विमोचन।
थराली।
पिंडर घाटी के थराली बुरसोल निवासी लेखक,बहुभाषाविद, शिक्षाविद धर्म सिंह फरस्वाण, एवम रोशनी फरस्वाण की त्रिभाषी पुस्तक का विमोचन
गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर, लैंसडौन के सभागार में किया गया इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के अंतर्गत फ्रेंच–अंग्रेज़ी–हिंदी त्रिभाषी शब्दकोश को बारीकी से पिरोया गया है।
पुस्तक का विमोचन ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, वीएसएम, कमांडेंट, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर द्वारा किया गया। इस अवसर पर लेखकों ने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंटल सेंटर को विमोचन स्थल के रूप में चुनने का मुख्य कारण ब्रिगेडियर नेगी व पूर्व कर्नल ईश्वर सिंह फर्स्वाण की दूरदर्शी सोच और सैनिकों के शैक्षणिक व बौद्धिक विकास के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता है। वे न केवल सैनिकों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहते हैं, बल्कि युवाओं के समग्र शैक्षणिक विकास हेतु भी निरंतर प्रेरणा प्रदान करते हैं।
इस गरिमामय समारोह में गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के वरिष्ठ अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे। साथ ही पूर्व कर्नल ईश्वर सिंह फरस्वाण, रोशनी फस्वाण सहित अनेक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर में इस त्रिभाषी शब्दकोश के विमोचन का उद्देश्य अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्थक है। रेजीमेंट के अनेक अधिकारी एवं सैनिक संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शांति स्थापना मिशनों के अंतर्गत विभिन्न देशों में सेवा के लिए प्रतिनियुक्त किए जाते हैं, जहाँ फ्रेंच भाषा का ज्ञान अत्यंत आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, सैन्य उपकरणों की खरीद, आधिकारिक यात्राओं, संयुक्त सैन्य अभ्यासों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दौरान भी फ्रांस एवं अन्य फ्रेंच-भाषी देशों के साथ प्रभावी संवाद की आवश्यकता पड़ती है। इस संदर्भ में फ्रेंच भाषा का ज्ञान व्यावहारिक एवं व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है। साथ ही साथ भारतीय सेवा वह अर्थ सेवा में कार्यरत सैनिकों व अधिकारियों के बच्चों के लिए भी यह किताब बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्तराखंड पर्यटन के अवसरों के होने के कारण यहां के युवाओं के लिए यह भाषण काफी लाभदायक हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि फ्रेंच भाषा विश्व के लगभग 40 देशों की मातृभाषा या आधिकारिक भाषा है। साथ ही अंग्रेज़ी के बाद फ्रेंच कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों की द्वितीय आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है। ऐसे में यह त्रिभाषी शब्दकोश न केवल सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के लिए, बल्कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा विदेशी भाषाओं में रुचि रखने वाले अध्येताओं के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लेखकों के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे भाषा के माध्यम से वैश्विक संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि इस पुस्तक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। हिंदी भाषियों की विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए वक्ताओं ने यह विचार भी व्यक्त किया कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना चाहिए। यह शब्दकोश फ्रेंच-भाषी देशों में हिंदी सीखने के इच्छुक लोगों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
समारोह का समापन राष्ट्रीय सेवा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा भाषाई ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ।