पोखरी में प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा के 20 शिक्षकों एवं 12 विद्यार्थियों ने हस्तकला कौशल के त्रिदिवसीय कार्यशाला में भाग लिया

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चमोली
पोखरी में प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा के 20 शिक्षकों एवं 12 विद्यार्थियों ने हस्तकला कौशल के त्रिदिवसीय कार्यशाला में भाग लिया

उत्तराखंड में पहली बार ब्लॉक पोखरी जनपद चमोली में ब्लॉक स्तर पर एससीईआरटी, एनईपी 2020, एनसीएफ 2023 की गाइडलाइंस के आधार पर सीसीआरटी के तत्वाधान में कार्यशाला की प्रभारी श्रीमती कुसुम गाड़िया व श्रीमती लता कोहली द्वारा तैयार की गई रूपरेखा में प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा के 20 शिक्षकों, 12 विद्यार्थियों ने हस्तकला कौशल पर एक त्रिदिवसीय कार्यशाला ( 22-24 अप्रैल 2025) का आयोजन किया। जिसमें विभागीय अधिकारी विनोद सिंह मटूड़ा, कुमारी नेहा भट्ट, परियोजना कार्यालय के समस्त कार्मिक उपस्थित रहे। इस कार्यशाला में हस्तकला कौशल की 06 विभिन्न थीम ( कठपुतली कला, पिरूल हस्तकला, पेपर क्राफ्ट, पारम्परिक ऐपण कला, केनवास पेंटिंग, वॉल पेंटिंग) पर कार्य किया गया।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी ने अपना बहुमूल्य समय मे से साढ़े तीन घंटे विद्यालयी शिक्षा परिवार को देकर अपने जीवन के अनुभवों को शेयर किया। साथ ही विभाग को मार्गदर्शन देने के साथ हस्तकौशल और आत्मनिर्भरता के बीच पारस्परिक अंतरसंबंधों को भी निजी अनुभवों के उदाहरण के माध्यम से समझाया। साथ ही पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली, पंचकोशीय ज्ञान व अनुभवजन्य ज्ञान की महत्ता को भी विस्तार से सभा के सम्मुख प्रस्तुत किया। साथ ही सर द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय उड़ामाण्डा के कक्षा 12 के शिक्षार्थी गौरव कुमार को उसकी पोट्रेट कला में उत्कृष्टता के लिए व्यक्तिगत तौर पर पुरस्कार भी दिया गया। इस अवसर पर बीडीओ पोखरी ने भी सरकार की विद्यार्थी व समुदाय के लिए उपयोगी कौशल व रोजगारपरक विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर बीईओ
विनोद सिंह ने स्कूलो में हस्तकला कौशल को शैक्षिक गतिविधियों से जोड़ने पर बल दिया। ताकि कौशलम कार्यक्रम को बढ़ावा देने के साथ हम सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, गणितीय, सामाजिक, आर्थिक, दार्शनिक व अकादमिक पहलुओं में भी अभिवृद्धि कर सकें और इस कार्यक्रम के उद्देश्य भी सबके सम्मुख रखे।
इस कार्यशाला में ऐपीएफ से कल्पना व उनका दल, वन विभाग, नगर पालिका पोखरी की अधिशासी अधिकारी श्रीमती बीना नेगी और कार्यक्रम के प्रबंधकों के सहयोग से सभी प्रतिभागियों हेतु प्रमाणपत्र, पुरस्कार (बेग, डायरी, किताब), भोजन/ मिष्ठान की व्यवस्था की गई।
इस कार्यशाला के मास्टर ट्रेनर के रूप में वन विभाग की पिरूल कला की मास्टर ट्रेनर श्रीमती विनीता देवी (भूतपूर्व ग्राम प्रधान, दशोली घुड़साल, पोखरी), ब्लॉक दशोली के ग्राम उर्गम की पारंपरिक वूलन क्राफ्ट की एमटी कुमारी करिश्मा, ब्लॉक पोखरी के ग्राम वीणा की क्राफ्ट कला की एमटी कुमारी अपराजिता के साथ ही सभी प्रतिभागी अध्यापकों और शिक्षार्थियों ने भी प्रशिक्षक व प्रशिक्षु दोनों की भूमिकाओं का निर्वहन किया।
इसी अवसर पर ब्लॉक पोखरी से जेएनवी, सैनिक स्कूल व इंस्पायर अवार्ड में चयनित कुल 04 शिक्षार्थियों के लिए विशेष पुरस्कार की व्यवस्था की गई, ताकि भविष्य में अन्य शिक्षार्थियों को भी प्रोत्साहन मिल सके। साथ ही इस अवसर पर पूर्व बीआरसी श्री राकेश भट्ट का भी उनके विगत कई वर्षों के परियोजना कार्यो में योगदान हेतु धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
इस कार्यक्रम की सम्पूर्ण पीपीटी का सुंदर प्रस्तुतिकरण शिक्षिका गुवाहाटी, उदयपुर से प्रशिक्षित शिक्षिका कुसुमलता गाड़िया व श्रीमती लता कोहली, सीसीआरटी गुवाहाटी व सीसीआरटी उदयपुर से प्रशिक्षित शिक्षिका वीणापाणी रावत ने किया। इस कार्यक्रम का संचालन की शिक्षिका रेखा पेटवाल व राकेश त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर कुसुमलता गड़िया द्वारा कठपुतली कला की विविध विधाओं से सभी शिक्षकों को अवगत कराया गया। इस कार्यशाला में कला में डॉ आशुतोष , शान्ति नेगी, मनोज, रूचि बिष्ट , वॉल पेंटिंग में लता, निशा और पुष्पा, क्राफ्ट में रमा किमोठी, अनिता राणा, विनोद रौतेला, प्रेम सिंह चौधरी, ऊन क्राफ्ट में पुष्पा नेगी, बबीता भण्डारी रावत, वीणापाणी रावत, ऐपण कला में समीर सर एवं चांदनी पलेठा एवं राकेश त्रिपाठी ने सक्रिय भूमिका निभायी। 20 नवाचारी शिक्षकों के सहित 30 छात्र छात्राओं की यह कार्यशाला बहुत प्रभावी रही।
कार्यशाला के अंत में नोडल व राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत कुसुम गाड़िया और शिक्षिका लता कोहली ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन इस आशा के साथ किया कि इस कार्यशाला से सीखे कौशलों का प्रयोग हम अपनी स्कूली गतिविधियों में करके अपनी कक्षाओं के सीखने के प्रतिफल, आत्मनिर्भर व विकसित भारत के उद्देश्य को साकार करने में कर रहे होंगे


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